यूपीआई सुरक्षा: डिजिटल भुगतान करते समय ये सात आदतें अपनाएँ
पिन, क्यूआर कोड, कलेक्ट रिक्वेस्ट और स्क्रीन शेयरिंग — धोखाधड़ी के सबसे आम रास्ते और उनसे बचने के व्यावहारिक तरीके।
हिम्मत टेक डेस्क

यूपीआई ने भुगतान को आसान बनाया है, लेकिन इसी आसानी का फ़ायदा ठग भी उठाते हैं। सबसे पहली और सबसे ज़रूरी बात यह समझना है कि पैसे प्राप्त करने के लिए कभी पिन डालने की ज़रूरत नहीं होती। पिन केवल भुगतान भेजते समय लगता है।
दूसरी आदत — किसी अनजान व्यक्ति की भेजी गई 'कलेक्ट रिक्वेस्ट' कभी स्वीकार न करें। यह अनुरोध आपके खाते से पैसे निकालने के लिए होता है, जमा करने के लिए नहीं। तीसरी, अनजान क्यूआर कोड स्कैन करके पिन डालने से बचें; क्यूआर स्कैन भी भुगतान भेजने की प्रक्रिया है।
चौथी, फ़ोन पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट कंट्रोल ऐप इंस्टॉल करने का अनुरोध हमेशा संदिग्ध मानें। पाँचवीं, ऐप केवल आधिकारिक स्टोर से इंस्टॉल करें और अपडेट समय पर करें। छठी, अपने बैंक का पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल हमेशा अद्यतन रखें ताकि हर लेनदेन की सूचना तुरंत मिले।
सातवीं आदत सबसे अहम है — धोखाधड़ी होने पर तुरंत शिकायत करें। जितनी जल्दी बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना मिलती है, रकम रोक पाने की संभावना उतनी बढ़ जाती है। लेनदेन का स्क्रीनशॉट, यूटीआर नंबर और समय सुरक्षित रखें।
डिजिटल भुगतान का सबसे मज़बूत सुरक्षा कवच तकनीक नहीं, आदत है। जल्दबाज़ी में लिया गया एक क्लिक ही अधिकतर मामलों में नुकसान की वजह बनता है।
लेखक
हिम्मत टेक डेस्क
टेक्नोलॉजी व डिजिटल इंडिया
तकनीक को आम पाठक की भाषा में समझाने वाला डेस्क — फ़ोन, इंटरनेट, भुगतान और सुरक्षा।


